मेरा बदन कैसा है

Mera badan kaisa hai?:

Kamukta, antarvasna मेरा नाम सुखपाल है मै लखनऊ का रहने वाला हूं लखनऊ में मैं अपनी एक छोटी सी किराने की दुकान चलाता हूं मुझे यह काम करते हुए 15 वर्ष हो चुके हैं मेरी उम्र 45 वर्ष की है। जब से मेरी शादी हुई है तब से मैं अपने दोस्तों से कम ही मिल पाया हूं मेरे दोस्त भी अपने काम में व्यस्त रहते हैं इस वजह से हम लोगों की मुलाकात कम ही हो पाती है परंतु एक दिन मुझे मेरा दोस्त रमनजीत मिला जब मेरी मुलाकात रमनजीत से हुई तो वह मुझसे मिलकर बहुत खुश था उसने मुझसे पूछा तुम क्या कर रहे हो? मैंने उसे बताया मैं आजकल अपनी एक दुकान संभाल रहा हूं। यह बात सुनकर वह मुझे कहने लगा तुम तो शायद नौकरी कर रहे थे मैंने उसे बताया हां कुछ समय तक मैंने नौकरी की थी परंतु उसके बाद मैंने अपना काम शुरू कर दिया, मेरा दोस्त बहुत ज्यादा जोर देते हुए मुझे कहने लगा तुम मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आना।

उसने अपने घर का पता मुझे दे दिया वह काफी समय बाद मुझे मिला था और जब उसने मुझे अपने घर का पता दिया तो मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें तुम्हारे घर पर मिलूंगा। थोड़ी देर बाद वह चला गया मैं भी अपने कामों में व्यस्त था इसी बीच में मेरे मामा जी की बड़ी लड़की की शादी थी उसकी शादी की सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर ही थी क्योंकि मेरे मामा जी मुझे बहुत मानते हैं मैंने हीं शादी में सारा काम संभाला और जब मेरी बहन की शादी हो गई तो उसके बाद हम लोगों ने उसे खुशी खुशी विदा कर दिया मेरे मामाजी खुश होकर मुझे कहने लगे बेटा तुमने बहुत ही अच्छे से अपनी जिम्मेदारी निभाई मैंने तुम्हें हमेशा अपना लड़का माना है। उनकी आंखों में नमी थी उसके बाद मैं वहां से अपने घर चला आया मैं अपनी दुकान का काम अच्छे से संभालने लगा था तभी उस बीच मुझे रमनजीत का फोन आया रमनजीत मुझे कहने लगा तुम मेरे घर पर नहीं आए मैंने उसे कहा यार मेरे मामा की लड़की की शादी थी इस वजह से मैं तुम्हारे घर पर नहीं आ पाया। जब मैंने अपने दोस्त से यह बात कही तो वह कहने लगा चलो कोई बात नहीं उसके कुछ समय बाद ही मैं रमनजीत के घर पर चला गया रमनजीत का घर देखकर मैं समझ गया कि वह अब काफी अच्छे पैसे कमाने लगा है और वह एक अच्छी सोसाइटी में रहता है।

मैंने रमनजीत से कहा यार तुम तो पूरी तरीके से बदल गए रमनजीत कहने लगा बस दोस्त मुझे मेहनत करनी पड़ी और मेहनत के बदले ही मुझे यह सब मिल पाया है मैंने रमनजीत से कहा चलो यह तो अच्छा हुआ। रमनजीत ने मुझे अपनी पत्नी और अपने बच्चों से मिलवाया मैं उसकी पत्नी और बच्चों से मिलकर बहुत खुश था मैं उन लोगों के लिए गिफ्ट भी लेकर गया हुआ था और जब मैंने उन्हें वह गिफ्ट दिया तो वह खुश हो गए मैंने उसके बच्चों को चॉकलेट दी तो वह खुश होकर मुझे कहने लगे अंकल आप बहुत अच्छे हैं। मैंने रमनजीत से कहा कभी तुम्हें समय मिले तो तुम भी मेरे घर पर आना रमनजीत कहने लगा क्यों नहीं मैं जरूर आऊंगा मैंने रमनजीत से कहा लेकिन मेरा घर तुम्हारे घर जितना बड़ा नहीं है रमनजीत कहने लगा तुम मेरे दोस्त हो और इसमें यह सब बातें कभी नहीं आनी चाहिए। इतने वर्षों बाद भी रमनजीत नहीं बदला था रमनजीत ने वह घर अपनी मेहनत से ही लिया था और मैं उसकी तरक्की से बहुत खुश था कुछ समय बाद रमनजीत मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आया जब वह मेरे घर पर आया तो वह मुझे कहने लगा लो आज मैं समय निकालकर तुम्हारे घर पर आ गया मैंने रमनजीत से कहा तुमने अच्छा किया जो मुझसे मिलने आ गए इसी बहाने हम दोनों की फैमिली को एक दूसरे से मिलने का मौका मिल जाएगा। रमनजीत बहुत खुश था और वह मेरी पत्नी और बच्चों से मिलकर बहुत खुश था उसकी पत्नी कहने लगी भाई साहब आपके घर में बहुत ही खुशहाली है और आप लोग कितने खुश रहते हो जब रमनजीत की पत्नी ने मुझे यह बात कही तो मैंने उन्हें कहा बस भाभी यह सब मेरी पत्नी की वजह से ही संभव हो पाया है नहीं तो हमारे घर में कहां इतनी खुशियां थी मेरी पत्नी ने हीं घर को बड़े अच्छे से संभाला है और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती आ रही है।

रमनजीत और उसके परिवार की हम लोगों ने बहुत अच्छे से आवभगत की उसके बाद तो हम लोगों का मिलना आम हो गया इतने सालों बाद हमारी दोस्ती दोबारा से उसी तरह थी जैसे कि पहले थी मैं बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि मेरा काम भी अच्छा चल रहा था और मेरे जीवन में सब कुछ सामान्य था। रमनजीत मुझे कहने लगा यार हम लोग कहीं घूमने का प्लान बनाते हैं मैंने उसे कहा लेकिन हम लोग घूमने कहां जाएंगे वह मुझे कहने लगा मेरे जीजा जी का एक रिजॉर्ट है जो कि मैकलोड़ गंज में है मैंने रमनजीत से कहा तो फिर हम लोग वहां जा सकते हैं वैसे भी मेरी पत्नी आज सुबह ही मुझे कह रही थी कि हम लोग काफी समय से एक साथ कहीं नहीं गए हैं। रमनजीत ने मुझे कहा वहां पर तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा मैं तो हमेशा ही वहां पर जाता रहता हूं और हर साल बच्चों के साथ वहां जाकर छुट्टियां मनाता हूं मैंने रमनजीत से कहा वैसे भी बच्चों की छुट्टियां पड़ने वाली है और तुमने बिलकुल सही समय पर मुझे यह बात कही मैं इस वर्ष वहीं घूमने की सोच रहा था। रमनजीत ने जब यह बात कही तो मैंने उसी शाम अपनी पत्नी को यह बात बताई मेरी पत्नी भी बहुत खुश थी और हम लोगों ने मैकलोडगंज जाने की पूरी तैयारी कर ली कुछ ही दिनों बाद बच्चों की छुट्टियां पड़ने वाली थी जैसे ही बच्चों की स्कूल की छुट्टियां पड़ी तो हम लोग मैकलोड़ गंज चले गए रमनजीत का परिवार भी बहुत खुश था और मेरा परिवार बहुत खुश था।

जब हम लोग मैकलोडगंज पहुंचे तो वहां पर मैंने देखा रमनजीत के जीजा जी का रिजॉर्ट काफी बड़ा था हम लोगों को वहां पर कोई भी परेशानी नहीं थी उन लोगों ने हमें हमारे रूम दिख दिए थे और उसके बाद हम लोग अपने रूम में चले गए। रमनजीत कहने लगा तुम क्या आराम करने वाले हो मैंने रमनजीत से कहा नहीं यार मैं कहां आराम करने आया हूं हम लोग तो इंजॉय करने आए हैं और पूरा इंजॉय करेंगे रमनजीत मुझे कहने लगा तो फिर हम लोग बार में चलते हैं। वही नीचे एक बार था जब हम लोग बार में गए तो वहां पर हम लोगों ने बियर आर्डर की रमनजीत और मैं साथ में बैठ कर बियर पी रहे थे। रमनजीत मुझसे अपने काम के बारे में बातें कर रहा था और मैं भी उसे अपने जीवन से जुड़ी कुछ बातें बता रहा था हम दोनों एक दूसरे से काफी देर बात करते रहें तभी हमारे बातें सुनकर एक व्यक्ति हमारे पास आकर बैठ गए और वह कहने लगे क्या मैं आप लोगों को ज्वाइन कर सकता हूं। हमने पहले तो एक दूसरे को देखा लेकिन हम दोनों उन्हें मना भी नहीं कर सकते थे इसलिए हम दोनों ने उन्हें कहा जी सर क्यों नहीं आप हमारे साथ बैठ सकते हैं वह हमसे बात करने लगे और जब वह हमसे बात करने लगे तो हमें भी अच्छा लगा। मैंने उनसे पूछा सर आप कहां से आए हुए हैं तो वह कहने लगे हम लोग दिल्ली से आए हुए हैं मैंने उन्हें कहा आपके साथ और कोई भी है तो वह कहने लगे हां मेरे साथ मेरी फैमिली भी आई हुई है, हम लोग आपस में बैठकर बात कर रहे थे। तभी कुछ देर बाद रमेश जी की पत्नी भी वहां पर आ गई उन्हें देखकर तो मैं पूरी तरीके उन पर फिदा हो गया उन्होंने वेस्टर्न ड्रेस पहनी हुई थी और वह बहुत बिंदास लग रही थी।

उन्होंने अपनी पत्नी का परिचय हमसे करवाया उनकी पत्नी का नाम संजना था। जब वह हमसे मिली तो मैं उन्हें देखता ही रहा जैसे ही उन्होंने मुझसे अपना हाथ मिलाया तो उनके कोमल हाथों को मुझे छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था। मैंने उन्हें कहा मैडम आप बहुत सुंदर हैं वह खुश हो गई और मेरी तरफ देखने लगी, उनकी प्यासी नजरे मुझे देख रही थी और मैं उनको देखकर खुश हो रहा था। वह हमारे साथ बैठकर ड्रिंक करने लगी हम लोगों को एक घंटे से ऊपर हो चुका था और हम सब आपस में बात कर रहे थे कुछ देर बाद संजना और उनके पति वहां से चले गए परंतु रमनजीत और मैं वहीं बैठे हुए थे। मैंने रमनजीत से कहा यार इनका फिगर तो कितना टाइट है। रमनजीत कहने लगा हां तुमने उनकी गांड देखी कितनी बड़ी थी, मैंने रमनजीत से कहा यार मेरा तो दिमाग ही खराब हो गया। जब हम लोग बार से बाहर निकले तो मैंने रमनजीत से कहा तुम चलो मैं आता हूं, रमनजीत चला गया और मैं थोड़ी देर बाद वहां से अपने रूम के लिए निकला, तभी मुझे संजना दिखाई दे गई, वह मेरी तरफ बड़े ध्यान से देख रही थी और मैं भी उनको देख रहा था। वह मुझे कहने लगी आओ रूम में बैठ जाओ जब उन्होंने मुझे रूम में आने के लिए कहा तो मै समझ गया कि उनके दिल में क्या चल रहा है और मैं उनके रूम में चला गया। उनके पति रमेश आराम से लेटे हुए थे और उनके बच्चे बाहर खेल रहे थे।

हम दोनों आपस में बात करने लगे वह कहने लगी क्या मैं इतनी सुंदर हूं। मैंने उन्हें कहा मैडम आप सोचिए मत आप कितने सुंदर हैं आपका बदन बढ़ा ही सेक्सी है। वह मुझे कहने लगी क्या मै इतनी हॉट हूं तो वह मुझसे चिपकने लगी। मैंने उनकी गांड को कसकर पकड़ लिया और उनके स्तनों को दबाने लगा जब मैंने उनके बदन से कपड़े उतारे तो उनका जोश और भी ज्यादा बढने लगा। मैंने जैसे ही अपने लंड को उनकी चूत पर रगडना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने भी उन्हें नीचे लेटाकर बहुत देर तक चोदा उनको बड़ा मजा आता और मैं उनके साथ सेक्स संबंध बनाते जाता। जैसे  ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने उन्हें कहा मैडम आपके साथ तो आज मजा ही आ गया। उनकी गांड देखकर मेरा मन हुआ कि मैं एक बार उन्हे और चोदू, मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर तेजी से धक्के देने शुरू किया। मेरे धक्के इतने तेज होते कि हम दोनों पसीना पसीना हो गए और जल्दी ही मेरा वीर्य दोबारा से गिर गया और वहां से मै अपने रूम में चला गया।


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