होली में फट गई चोली भाग ३

जल्दी से मैंने सलवार चढाई, कुरता सीधा किया और बाहर निकली. दर्द से चला भी नहीं जा रहा था. किसी तरह सासु जी के बगल में पलंग पे बैठ के बात की. मेरी छोटी ननद ने छेड़ा, “क्यों भाभी, बहुत दर्द हो रहा है.?”
मैंने उसे उस वक्त खा जाने वाली नज़रों से देखा. सासु बोली, “बहु, लेट जाओ…” लेटते ही जैसे मेरे चूतडो में करंट दौड़ गया हो. एक भयंकर दर्दभरी टीस उठी. उन्होंने समझाया, “करवट हो के लेट जाओ, मेरी ओर मुँह कर के…” और मेरी जेठानी से बोली, “तेरा देवर बहुत बदमाश है, मैं फूल-सी बहु इसीलिए थोड़ी ले आई थी.”
“अरी माँ, इसमें भैया का क्या दोष.? मेरी प्यारी भाभी है ही इत्ती प्यारी और फिर ये भी तो मटका-मटका कर……..” उनकी बात काट के मेरी ननद बोली.
“लेकिन इस दर्द का एक ही इलाज है, थोड़ा और दर्द….. कुछ देर के बाद आदत पड़ जाती है.” मेरा सर प्यार से सहलाते हुए मेरी सासु जी धीरे से मेरे कान में बोली.

“लेकिन भाभी भैया को क्यों दोष दे? आपने ही तो उनसे कहा था मारने के लिये…… खुजली तो आपको ही हो रही थी.” सब लोग मुस्कुराने लगे और मैं भी अपनी गाण्ड में हो रही टीस के बावजूद मुस्कुरा उठी.
सुहागरात के दिन से ही मुझे पता चल गया था की यहाँ सब कुछ काफी खुला हुआ है. तब तक वो आके मेरे बगल में रजाई में घुस गए. सलवार तो मैंने ऐसे ही चढा ली थी. इसलिए आसानी से उसे उन्होंने मेरे घुटने तक सरका दी और मेरे चूतडो को सहलाने लगे.
मेरी जेठानी उनसे मुस्कुराकर छेड़ते हुए बोली, “देवर जी, आप मेरी देवरानी को बहोत तंग करते है और तुम्हारी सजा ये है की आज रात तक अब तुम्हारे पास ये दुबारा नहीं जायेगी.”

मेरी सासु जी ने उनका साथ दिया. जैसे उनके जवाब में उन्होंने मेरे गाण्ड के बीच में छेदती उँगली को पूरी ताकत से एक ही झटके में मेरी गाण्ड में पेल दिया. गाण्ड के अंदर उनका वीर्य लोशन की तरह काम कर रहा था. फिर भी मेरी चीख निकल गई. मुस्कराहट दबाती हुई सासु जी किसी काम का बहाना बना बाहर निकल गई. लेकिन मेरी ननद कहाँ चुप रहने वाली थी.
वो बोली, “भाभी, क्या हुआ.? किसी चींटे ने काट लिया क्या.?”
“अरे नहीं लगता है, चीटा अंदर घुस गया है.” छोटी वाली बोली.
“अरे मीठी चीज होगी तो चीटा लगेगा ही. भाभी आप ही ठीक से ढँक कर नहीं रखती हो क्या.?” बड़ी वाली ने फिर छेड़ा.
तब तक उन्होंने रजाई के अंदर मेरा कुरता भी पूरी तरह से ऊपर उठा के मेरी चूची दबानी शुरू कर दी थी और उनकी उँगली मेरी गाण्ड में गोल-गोल घूम रही थी.

“अरे चलो बेचारी को आराम करने दो, तुम लोगों को चींटे से कटवाउंगी तो पता चलेगा.” ये कह के मेरी जेठानी दोनों ननदों को हांक के बाहर ले गई. लेकिन वो भी नहीं थी. ननदों को बाहर करके वो आई और सरसों के तेल की शीशी रखती बोली, “ये लगाओ, Anti-Septic भी है.”
तब तक उनका हथियार खुल के मेरी गाण्ड के बीच धक्का मार रहा था. निकल कर बाहर से उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.
फिर क्या था.? उन्होंने मुझे पेट के बल लिटा दिया और पेट के नीचे दो तकिये लगा के मेरे चूतड़ ऊपर उठा दिए. सरसों का तेल अपने लंड पे लगा के सीधे शीशी से ही उन्होंने मेरी गाण्ड के अंदर डाल दिया.
वो एक बार झड़ ही चुके थे इसलिए आप सोच ही सकते है इस बार पूरा एक घंटा गाण्ड मारने के बाद ही वो झडे और जब मेरी जेठानी शाम की चाय ले आई तो भी उनका मोटा लंड मेरी गाण्ड में ही घुसा था.
उस रात फिर उन्होंने दो बार मेरी गाण्ड मारी और उसके बाद से हर हफ्ते दो-तीन बार मेरे पिछवाड़े का बाजा तो बज ही जाता है.

मेरी बड़ी ननद रानू मुझे Flash-back से वापस लाते हुए बोली, “क्या भाभी, क्या सोच रही है अपने भाई के बारे में..???”
“अरे नहीं तुम्हारे भाई के बारे में…” तब तक मुझे लगा कि मैं क्या बोल गई.? और मैं चुप हो गई.
“अरे भाई नहीं अब मेरे भाईयों के बारे में सोचिये, फागुन लग गया है और अब आपके सारे देवर आपके पीछे पड़े है. कोई नहीं छोड़ने वाला आपको और ननदोई है सो अलग..” वो बोली.
“अरे तेरे भाई को देख लिया है तो देवर और ननदोई को भी देख लूंगी……” गाल पे चिकौटी काटती मैं बोली.

होली के पहले वाली शाम को वो आया……..
पतला, गोरा, छरहरा किशोर. अभी रेखा आई नहीं थी. सबसे पहले मेरी छोटी ननद मिली और उसे देखते ही वो चालू हो गई, ‘चिकना’
वो भी बोला, “चिकनी…” और उसके उभरते उभारों को देख के बोला, “बड़ी हो गई है.” मुझे लग गया कि जो ‘होने’ वाला है वो ‘होगा’. दोनों में छेड़-छाड़ चालू हो गई.
वो उसे ले के जहाँ उसे रुकना था, उस कमरे में ले गई. मेरे bed room से एकदम सटा, Ply का Partition कर के एक कमरा था उसी में उसके रुकने का इंतज़ाम किया गया था. उसका bed भी, जिस Side हम लोगों का bed लगा था, उसी से सटा था.
मैंने अपनी ननद से कहा, “अरे कुछ पानी-वानी भी पिलाओगी बेचारे को या छेड़ती ही रहोगी..???”
वो हँस के बोली, “भाभी अब इसकी चिंता मेरे ऊपर छोड़ दीजिए.” और गिलास दिखाते हुए कहा, “देखिये इस साले के लिये खास पानी है.”
जब मेरे भाई ने हाथ बढ़ाया तो उसने हँस के गिलास का सारा पानी, जो गाढा लाल रंग था, उसके ऊपर उड़ेल दिया. बेचारे की सफ़ेद शर्ट पर…. लेकिन वो भी छोड़ने वाला नहीं था. उसने उसे पकड़ के अपने कपड़े पे लगा रंग उसकी frock पे रगड़ने लगा और बोला, “अभी जब मैं डालूँगा ना अपनी पिचकारी से रंग, तो चिल्लाओगी”
वो छूटते हुए बोली, “बिल्कुल नहीं चिल्लाउंगी, लेकिन तुम्हारी पिचकारी में कुछ रंग है भी कि सब अपनी बहनों के साथ खर्च कर के आ गए हो..???”

वो बोला, “सारा रंग तेरे लिये बचा के लाया हूँ, एकदम गाढ़ा सफ़ेद”
उन दोनों को वही छोड़ के मैं गई रसोईघर में जहाँ होली के लिये गुझिया बन रही थी और मेरी सास, बड़ी ननद और जेठानी थी. गुझिया बनाने के साथ-साथ आज खूब खुल के मजाक, गालियाँ चल रही थी. बाहर से भी कबीर गान, गालियों कि आवाज़ें, फागुनी बयार में घुल-घुल के आ रही थी.

ठण्डाई बनाने के लिये भांग रखी थी और कुछ बर्फी में डालने लिये.
मैंने कहा, “कुछ गुझिया में भी डाल के बना देते है, लोगों को पता नही चलेगा.?!!! और फिर खूब मज़ा आएगा.”
मेरी ननद बोली, “हाँ, और फिर हम लोग वो आप को खिला के नंगा नचायेंगे…..”
मैं बोली, “मैं इतनी भी बेवकुफ नहीं हूँ, भांग वाली और बिना भांग वाली गुझिया अलग-अलग डब्बे में रखेंगे.”
हम लोगों ने तीन डिब्बों में, एक में Double Dose वाली, एक में Normal भांग की और तीसरे में बिना भांग वाली रखी. फिर मैं सब लोगों को खाना खाने के लिये बुलाने चल दी.
मेरा भाई भी उनके साथ बैठा था. साथ में बड़ी ननद के Husband मेरे ननदोई भी….. उनकी बात सुनके मैं दरवाजे पे ही एक मिनट के लिये ठिठक के रुक गई और उनकी बात सुनने लगी. मेरे भाई को उन्होंने सटा के, Almost अपने गोद में (खींच के गोस में ही बैठा लिया). सामने ननदोई जी एक बोतल (दारू की) खोल रहे थे. मेरे भाई के गालों पे हाथ लगा के बोले, “यार तेरा साला तो बड़ा मुलायम है..”
“और क्या एकदम मक्खन मलाई….” दूसरे गाल को प्यार से सहलाते ‘ये’ बोले.
“गाल ऐसा है तो फिर गाण्ड तो…… क्यों साले कभी मरवाई है क्या..??” बोतल से सीधे घुट लगाते मेरे ननदोई बोले और फिर बोतल ‘उनकी’ ओर बढ़ा दी.

मेरा भाई मचल गया और मुँह फूला के अपने जीजा से बोला, “देखिये जीजाजी, अगर ये ऐसी बात करेंगे तो….”
उन्होंने बोतल से दो बड़ी घुट ली और बोतल ननदोई को लौटा के बोले, “जीजा, ऐसे थोड़े ही पूछते है.!! अभी कच्चा है, मैं पूछता हूँ…”
फिर मेरे भाई के गाल पे प्यार से एक चपत मार के बोले, “अरे ये तेरे जीजा के भी जीजा है, मजाक तो करेंगे ही…. क्या बुरा मानना..?? फिर होली का मौका है. तू लेकिन साफ-साफ बता, तू इत्ता गोरा चिकना है लौंडियों से भी ज्यादा नमकीन, तो मैं ये मान ही नहीं सकता कि तेरे पीछे लड़के ना पड़े हो.!!! तेरे शहर में तो लोग कहते है कि अभी तक इसलिए बड़ी लाइन नहीं बनी कि लोग छोटी लाइन के शौक़ीन है.” और उन्होंने बोतल ननदोई को दे दी.

ना नुकुर कर के उसने बताया कि कई लड़के उसके पीछे पड़े तो थे और कुछ ही दिन पहले वो साईकिल से जब घर आ रहा था तो कुछ लडको ने उसे रोक लिया और जबरन स्कुल के सामने एक बांध है, उसके नीचे गन्ने के खेत में ले गए. उन लोगों ने तो उसकी पेन्ट भी सरका के उसे झुका दिया था. लेकिन बगल से एक टीचर की आवाज सुने पड़ी तो वो लोग भागे.
“तो तेरी कोरी है अभी..??? चल हम लोगों की किस्मत… कोरी मारने के मज़ा ही और है.” ननदोई बोले और अबकी बोतल उसके मुँह से लगा दिया. वो लगा छटपटाने….

उन्होंने उसके मुँह से बोतल हटाते हुए कहा, “अरे जीजा अभी से क्यों इसको पीला रहे है..???” (लेकिन मुझको लग गया था कि बोतल हटाने के पहले जिस तरह से उन्होंने झटका दिया था, दो-चार घूंट तो उसके मुँह में चला ही गया.) और खुद पिने लगे.
“कोई बात नहीं…कल जब इसे पेलेंगे तो पिलायेंगे….” संतोष कर ननदोई बोले.
“अरे डरता क्यों है.??” दो घुट ले उसके गाल पे हाथ फेरते वो बोले, “तेरी बहना की भी तो कोरी थी, एकदम कसी… लेकिन मैंने छोड़ी क्या.?? पहले उँगली से जगह बनाई, फिर क्रीम लगा के, प्यार से सहला के, धीरे-धीरे और एक बार जब सुपाडा घुस गया, वो चीखी, चिल्लाई लेकिन…. अब हर हफ्ते उसकी पीछे वाली दो-तीन बार तो कम से कम…..” और उन्होंने उसको फिर से खींच के अपनी गोद में सेट करके बैठाया.
दरवाजे की फाँक से साफ़ दिख रहा था. उनका पजामे जिस तरह से तना था मैं समझ गई कि उन्होंने Center करके सीधे वहीँ लगा के बैठा लिया उसको. वो थोड़ा कुनमुनाया, पर उनकी पकड़ कितनी तगड़ी थी, ये मुझसे बेहतर और कौन जान सकता था.? उन्होंने बोतल अब ननदोई को बढ़ा दी…

“यार तेरी बीवी यानी कि मेरी सलहज के चूतड़ इतने मस्त है कि देख के खड़ा हो जाता है… और ऊपर से गदराई उभरी-उभरी चुचियाँ….हाय….. बड़ा मज़ा आता होगा तुझे उसकी चूची पकड़ के गाण्ड मारने में..है ना.???”
बोतल फिर ननदोई जी ने वापस कर दी. एक घुट मुँह से लगा के ‘ये’ बोले, “एकदम सही कहते है आप… उसके दोनों मम्मे बड़े कड़क है… मज़ा भी बहोत आता है उसकी गाण्ड मारने में…..”
“अरे बड़े किस्मत वाले हो साले जी, बस एक बार मुझे मिल जाये ना गंगा कसम जीवन धन्य हो जाये…. समझ लो कि मज़ा आ जाये यार……” ननदोई जी ने बोतल उठा के कस के लंबी घुट लगाई… अपनी तारीफ सुन के मैं भी खुश हो गई थी… मेरी ‘गिलहरी’ भी अब फुदकने लगी थी.

“अरे तो इसमें क्या…??? कल होली भी है और रिश्ता भी…..” बोतल अब उनके पास थी. मुझे भी कोई ऐतराज नहीं था. मेरा कोई सगा देवर था नही, फिर ननदोई जी भी बहुत रसीले दिख रहे थे.
“तेरे तो मज़े है यार….कल यहाँ होली और परसों ससुराल में…. किस उम्र की है तेरी सालियाँ…..?” ननदोई जी अब पुरे रंग में थे.
‘इन्होने’ बोला कि “बड़ी वाली 18(**Edited**) की है और दूसरी थोड़ी छोटी है…(मेरी छोटी ननद का नाम ले के बोले) उसके बराबर होगी…”
“अरे तब तो चोदने लायक वो भी हो गई है……” मज़े लेते हुए ननदोई जी बोले.
“अरे उससे भी 4-5 महीने छोटी है छुटकी…” मेरा भाई जल्दी से बोला.
अबतक ‘इन्होने’ और ननदोई ने मिल कर उसे 8-10 घुट पीला ही दिया था. वो भी अब शर्म-लिहाज छोड़ चुका था…
“अरे हां….साले साहब से ही पूछिये ना उनकी बहनों का हाल. इनसे अच्छा कौन बताएगा.????” ‘ये’ बोले.
“बोल साले, बड़ी वाली की चुचियाँ कितनी बड़ी है…???”
“वो…वो उमर में मुझसे एक साल बड़ी है और उसकी…..उसकी अच्छी है….थोड़ी….. मेरा मतलब है… दीदी के जितनी तो नहीं….हां दीदी से थोड़ी छोटी….” हाथ के इशारे से उसने बताया….
मैं शर्मा गई….चुत पानी-पानी हो चुकी थी….लेकिन अच्छा भी लगा सुन के कि मेरा ममेरा भाई मेरे उभारों पे नज़र रखता है….
“अरे तब तो बड़ा मज़ा आयेगा तुझे उसके जोबन (Boobs) दबा-दबा के रंग लगाने में….” ननदोई ‘इनसे’ बोले और फिर मेरे भाई से पूछा, “और छुटकी की….????”

“वो उसकी…. उसकी अभी…..” ननदोई बेताब हो रहे थे…. वो बोले, “अरे साफ-साफ बता, उसकी चुचियाँ अभी आयी है कि नहीं..???”
हे राम…. चुत में तो जैसे सैलाब उमड़ आया हो…… मुझसे रहा न गया, दो-तीन उंगलियां गचाक से चुत में पेल दी……
“आयीं तो है बस अभी….. लेकिन उभार रही है… छोटी है बहुत….” वो बेचारा बोला…
“अरे उसी में तो असली मज़ा है…. चुचियाँ उठान में हो तो मीजने में, पकड़ के पेलने में…. चूतड़ कैसे है..???”
“चूतड़ तो दोनों सालियों के बड़े सेक्सी है…. बड़ी के उभरे-उभरे और छुटकी के कमसिन लौण्डों जैसे….. मैंने पहले तय कर लिया है कि होली में अगर दोनों सालियों की कच-कचा के गाण्ड ना मारी…….”
“तुम जब होली से लौट के आओ तो अपनी एक साली को साथ ले आना…उसी छुटकी को….फिर यहाँ तो रंग पंचमी को और जबरदस्त होली होती है. उसमे जम के होली खेलेंगे साली के साथ…..”
आधी से ज्यादा बोतल खाली हो चुकी थी और दोनों नशे के सुरूर में थे. थोड़ा बहुत मेरे भाई को भी चढ़ चुकी थी….

“एकदम….जीजा, ये अच्छा Idea दिया आपने. बड़ी वाली का तो Board का इम्तिहान है लेकिन छुटकी तो अभी 9वीं में है. 10-15 दिन के लिये ले आयेंगे उसको…..”
“अभी वो छोटी है…..” वो फिर जैसे किसी Record की सुई अटक गई हो बोला.
“अरे क्या छोटी-छोटी लगा रखी है..??? उस कच्ची कली की फुद्दी को पूरा भोसड़ा बना के 15 दिन बाद भेजेंगे यहाँ से, चेहे तो तुम फ्रोक उठा के खुद देख लेना…” बोतल मेज पे रखते ‘ये’ बोले.
“और क्या..??? जो अभी शर्मा रही होगी ना, जब जायेगी तो मुँह से फूल की जगह गालियाँ झड़ेंगी, रंडी को भी मात कर देगी वो साली….” ननदोई बोले.

(TBC)…


Comments are closed.



Online porn video at mobile phone


chudai wife kiholi ki kamuk kahaniपति का बॉस सेक्स स्टोरीपति के दोस्त से चुदाईchachi ki chudai ki storychudai se pregnantjabardasti chudai ki videomausi ki jawaniBhabhi ko lund dikay kal pornbhai se chudai ki kahaniMuslim Bhai ne bhen foda sex xxx dawlodDidi ki jijaji ke dosto ke sath samohik chudai Dekhi storysaxey kahanibur choda chodiwww chodanlong chudai ki kahanibhabhi ki cumazdoor ki chudaiwww xxx hindi storychudai ki mast mast kahaniyamaa ko gand marashort hindi sex storiesmeri suhagraat ki kahanigao ki chudai ki kahanihot bhabhi kahanihindi pdf sex kahanibur chudai kahanibahan ki chudai in hindi storysuhagrat sexxmota lamba lundsex story of a girl in hindimaa ke sath sex kiyasex stories chudayi ki pyasi jawan bhabhi chud gayi pati se khushi nhi mili toh patayaapni didi ko chodaantarvasna bhabhi ki chutWww.सास दमाद की चूदाइ कहानिया हिँदीchudai story websiteखेल खेल मे रिषतो की chudai इन hindisadi me bhabhi ki chudaichut chudai ki mast kahanigaon ki chudai ki kahanipratiksha ki chudaisexy gand ki chudaiLand chut hindi storypure hindi chudaichoot lene ke tarikehindiseybhabhimeri chudai bhaisex hot kahaniजबरदस्ती baap ne beti ko chodhaa xxx maaफौलादी एक sex videosfucking chudchahat hawas ki.khani incestdesisexkhaniyaantarvasna hindi bhabhi ki chudaiआंटी संध्या दोस्त बेटे का चुड़ैElectrician ke sath sex storyxxx khaniya hindi saja me majabahan ki chudai kiसेक्स स्टोरी बहन चुड़ै रूपएDidi ki gad mari holi me xxx storaydesi bhossexy chodaipati ki gairmaujudgi me chacha sasur se chudwayamust chudai ki kahanirandi ki chudaiजवान लडकी कहानीantarvasna marathi kathaanty hot sexhindi sex store comहोसटल मे गे सेकस कहानियाantrwasna hindi com